मुस्कान खो गयी

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मोहब्बत   में  जिंदगी   इम्तिहान  हो  गयी,
कहीं  मन खो गया, कहीं  मुस्कान खो गयी ।
वादे तो  हमारे  बीच  जन्मों-जन्मों  के  थे ,
क्यूँ दूरी  हमारे प्यार  के  दरम्यान हो गयी ।
आज भी नजरें करती हैं तेरे आने का इन्तजार,
तेरे न  आने  से  मोहब्बत बदनाम हो गयी ।
भूलना मुमकिन नहीं है मेरे  प्यार  को  मगर,
तेरी  ख़ामोशी  से  जिंदगी  बेनाम  हो गयी ।

विजय कुमार सिंह
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