हड्डी टूटीं बाएं की, शल्य दाएं का…

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हड्डियां टूटीं  बाएं की, शल्य दाएं  का हो गया,
एक पैर पर चलता था, अब दोनों ही खो गया ।
सोच रहा हूँ  अपना  एक  हाथ  भी  तुड़वा लूँ,
शल्य कराने जाऊं दूसरे  से दामन  छुड़वा  लूँ ।
चार चिकित्सकों से मांग लूंगा  विनम्र  सहयोग,
अपने कन्धों पर पहुंचा, करवा दो अंतिम योग ।
टूट-फूट  से  सदा  को  मिल  जाएगी  मुक्ति,
चिकित्सकों का प्रयास और चिकित्सकीय युक्ति ।
ऐसे ही  चिकित्सकों  का  खूब  हो  रहा  भला,
आँख, गुर्दा किसी का, किसी का किडनी निकला ।
चिकित्सकीय खर्चा  तो  लेते  हैं  सब  बढ़-चढ़,
तिसपर भी इलाज  में  करते  हैं  सब  गड़बड़ ।
अंग निकाला लाखों आये, जिंदगी किसी की जाये,
मौसमी खांसी-खराश में,टी.बी.का इलाज हो जाये।
फीस ऊँची, दवा कमीशन, जांच जरूरी होती जाये,
जांचघर के चिरकुट पर बड़ा कमीशन बनकर आये।
मामूली भले हो बीमारी,  दवा चलेगी लम्बी-भारी,
रिपोर्ट की तीमारदारी, अविश्वास अनुभव पर भारी।
भाग्य ने अगर साथ दिया, बीमारी ने निजात दिया,
दवा ने  काम नहीं किया, ऊपरवाले ने हाथ दिया ।
विजय कुमार सिंह
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