जय हिन्द

गाँधी टोपी पहिन के टोपी दें पहिनाय । 
पांच बरस का वोट लें एक दिन नजर न आय । 

लूट का राज बन गया राजनीति दूषाय । 
प्रजा राज के नाम पर वंश को सींचा जाय । 

धरम धरम में भेद कर जाति जाति लड़ाय । 
अपने-अपने मत को नफ़रत दें फैलाय । 

आपदा की चिंता नहीं लाभ देख सहयोग । 
मदद की राशि बँट रही बिचौलियों का भोग । 

जो न हो किसी काम का वह नेता बन जाय । 
राज मिले जब हाथ में जन पे रोब जमाय । 

विकास को नहीं धन जुटे मन का वेतन पाय । 
अपना हाथ जगन्नाथ रोक टोक ना भाय । 

व्यवस्था अति क्षीण भई धन धन को ही जाय । 
लाखों-जन की जिंदगी एक हाथ में आय । 

जय हिन्द-जय मजबूरी जय अमीर की होय । 
जय हिन्द-जय लाचारी जय नेता की होय । 

जय हिन्द-जय दुराचार जय पुलिसन की होय । 
जय हिन्द जय भ्रष्टाचार जय शासन की होय । 

विजय कुमार सिंह
vijaykumarsinghblog.wordpress.com


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