आसमाँ एक खुद का….

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
👉दिनांक : २९/११/२०२०
👉दिन : रविवार
👉विधा : गजल
👉बह्र : २१२ २१२ २१२ २१२
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🌹
आसमाँ एक खुद का बना लीजिये ।
चाँद पर आशियाँ भी सजा लीजिये ।
🌹🌹
जिंदगी जो मिली फिर मिले या नहीं
प्रेम का गीत गा दिल चुरा लीजिये ।
🌹🌹🌹
कुछ कही या सुनी बात हों जो बुरी
दिल जो टूटे हुए हों मिला लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹
रात ढलती नहीं दिन निकलता नहीं
आँख मूंदे पड़े जो जगा लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹🌹
आदमी की गलत जिद नहीं है भली
राह सीधी सही है मना लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
दिल के दीपक को रोशन करें इस कदर
एक सूरज सा खुद को बना लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
रोशनी कम नहीं इस जहां में मगर
खुद की नजरें तो पैनी बना लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
दिलजलों की जहां में कमीं तो नहीं
दिल लगाना ही उनसे छुड़ा लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
गीत ऐसा चुनें जो अमर हो सके
राग में यूँ “विजय” को बसा लीजिये ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
👉स्वरचित, स्वप्रमाणित
👉विजय कुमार सिंह
👉पटना, बिहार.
👉@सर्वाधिकार सुरक्षित

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s