खुद की यादों में….

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
👉दिनांक : १६/१२/२०२०
👉दिन : बुधवार
👉विधा : गजल
👉बह्र : २१२२ १२२२ २१२२
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
🌹
मौन, यादों में ही जीना चाहता हूँ ।
जाम हसरत भरे पीना चाहता हूँ ।
🌹🌹
फिर हकीकत सजी है ख्वाबों में आकर
है ये लम्बा सफर दीना चाहता हूँ ।
🌹🌹🌹
बर्फ जीवन में जो छाई आजतक है
उससे बचने को पश्मीना चाहता हूँ ।
🌹🌹🌹🌹
एक आदत बुरी जो जाती नहीं है
वक़्त का जोश तखमीना चाहता हूँ ।
🌹🌹🌹🌹🌹
शोर खामोशियों का छाया रहा है
होंठ सन्नाटों के सीना चाहता हूँ ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹
लम्हे लम्हों में सिमटे जाते रहे हैं
वक़्त की बाहों में रीना चाहता हूँ ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
हूर बनकर दिलों पर छाये “विजय” जो
उसके श्रृंगार में मीना चाहता हूँ ।

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

दीना #देवी
पश्मीना #ऊनी कपड़ा
तखमीना #अंदाज
रीना #प्यारा
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
👉स्वरचित, स्वप्रमाणित
👉विजय कुमार सिंह
👉पटना, बिहार.
👉@सर्वाधिकार सुरक्षित

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s