एक दीपक तो खुद से….

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👉दिनांक : २०/१२/२०२०
👉दिन : रविवार
👉विधा : गजल
👉बह्र : 2122 1122 1122 22
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एक दीपक तो कहीं खुद से जलाओ यारों ।
गैर जीवन से अँधेरा तो मिटाओ यारों ।
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आसमाँ हो खुद का और जमीं भी खुद की
खुद से हटकर दुनिया भी तो बसाओ यारों ।
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है चमकने की जो चाहत तो सिमटना फिर क्यों
राह दिल की खोलकर दिल से लगाओ यारों ।
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जिंदगी साथ निभाने के लिए होती है
दूर रह दिल के घरौंदा न बनाओ यारों ।
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प्रेम है तो दुनिया है फिर नफरत कैसी
सोच में अपने समर्पण तो दिखाओ यारों ।
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दौड़ कैसी ये हुई जीत गिराकर हासिल
देख जख्मी को बढ़ो थाम उठाओ यारों ।
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खौफ हो रब का “विजय”, कर्म हों अच्छे सारे
राह सच्ची वो बनाकर तो सजाओ यारों ।
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👉स्वरचित, स्वप्रमाणित
👉विजय कुमार सिंह
👉पटना, बिहार.
👉@सर्वाधिकार सुरक्षित

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