वर्ष 2020

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👉दिनांक : ३१/१२/२०२०
👉दिन : गुरुवार
👉विधा : गजल
👉बह्र : 122 122 122 12
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कहाँ साल बीता, बिताया गया ।
अँधेरों से दिल को लगाया गया ।
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कहीं थी जुदाई, कहीं गमजदा
तड़प को छिपाकर बहाया गया ।
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कफन को लिए साथ घर से चले
बँधे फर्ज हाथों, बुलाया गया ।
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बसे जिनके दिल में, न दिल से लगे
न रिश्तों का बंधन निभाया गया ।
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न जिल्ले इलाही, न दरबार था
बसा खौफ दिल में छिपाया गया ।
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बनी खौफ खुशबू, चमन खौफ में
हवा को भी ऐसे हटाया गया ।
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डरी साँसें थीं जो घुटन पी रही
न ताजी हवा को पिलाया गया ।
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रहे दूर रिश्ते हो रिश्तों से खुद
यही जिंदगी है बताया गया ।
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मिली थी न रोटी, कफन भी नहीं
सरे राह जिनको सुलाया गया ।
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लिए साथ हसरत जो जीता रहा
“विजय” ख्वाब उसका मिटाया गया ।
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👉स्वरचित, स्वप्रमाणित
👉विजय कुमार सिंह
👉पटना, बिहार.
👉@सर्वाधिकार सुरक्षित

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