कोई सागर पिला देना…

🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
👉दिनांक : २०/०३/२०२१
👉दिन : शनिवार
👉विधा : गजल
👉बह्र : 1222 1222 1222 1222
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
【१】
तलब बूंदों से ज्यादा है, कोई सागर पिला देना ।
युगों की प्यास बाकी है, बुझी ख्वाहिश जिला देना ।
【२】
कभी थे पास जो अपने, नजर से दूर ही रहते
दिलों की कोशिशें जारी, कमल कोई खिला देना ।
【३】
सजी संवरी मगर रूठी, निगाहों में समाई है
बनाकर प्रीत के बंधन, मुहब्बत का सिला देना ।
【४】
बहुत कीं कोशिशें फिर भी, कहाँ ये प्यास बुझती है
जगी जो प्यास जन्मों की, तो दिल से दिल मिला देना ।
【५】
सफर का आखिरी लम्हा, सितारों तक चले रस्ते
“विजय” हँसते नमस्ते कह, नई मंजिल दिला देना ।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
👉स्वरचित, स्वप्रमाणित
👉विजय कुमार सिंह
👉पटना, बिहार.
👉@सर्वाधिकार सुरक्षित

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s