नवरात्रि

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नमामि हे शैलपुत्री प्रथम दिवस नवरात्र.

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नमामि हे ब्रह्मचारिणी द्वितीय दिवस नवरात्र.

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नमामि हे चन्द्रघंटा तृतीय दिवस नवरात्र.

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नमामि हे कूष्माण्डा चतुर्थ दिवस नवरात्र.

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नमामि हे स्कंदमाता पंचम दिवस नवरात्र.

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नमामि हे कात्यायनी षष्ठ दिवस नवरात्र.

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नमामि हे कालरात्रि सप्तम दिवस नवरात्र.

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नमामि हे महागौरी अष्टम दिवस नवरात्र.

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नमामि हे सिद्धिदात्री नवम दिवस नवरात्र.

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कोटि कोटि नमामि हे जगदम्बे, नमन है बारम्बार.

नवरात्र की हार्दिक शुभकामनाये.

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आत्महत्या

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सन्नाटे खामोशियाँ तज सरहद को लड़ रहे हैं
शहर भीड़ के साथ मिलकर चहुँओर बढ़ रहे हैं
उदासियाँ अब अंतर्मुखी हो जीने को हैं बेबस
लोग अपना मकां ध्वस्त करने पर अड़ रहे हैं.

विजय कुमार सिंह

स्वार्थ

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स्वार्थ की उड़ान अब नभ को चूमने लगी
आकांक्षाएं नए रूप धर नित झूमने लगी
जिनसे जन्मे धन से जुड़े सेवा भूल गए
इंसानियत घर-घर में अब यूँ घूमने लगी.

विजय कुमार सिंह

हिंदी दिवस

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मुक्त करो जंजीरों से हे व्यवस्था के सरदारों
मैं हूँ हिंदी मातृभाषा मेरा रूप मिलकर संवारों
घर के तिरष्कारों ने पराया बना दिया मुझको
जागो युवाओं अब तुम ही मेरे चरण पखारो.

विजय कुमार सिंह

समृद्धि

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पहले मन को धोइये  फिर  घर-आँगन  द्वार
मधुर  वचन  बोलिये  तजिये  रूखा  व्यवहार
पावन मन से सजेगा घर-परिवार देश-समाज
लक्ष्मी स्वयं ही आएँगी  करेंगी समृद्ध अपार.

विजय कुमार सिंह

कांच

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कुछ टूट सा गया था वफ़ा के रूठ जाने के बाद
दर्द जाग सा गया था लाख समझाने के बाद
खामोश दीवारें गिन रही थीं बेचैन साँसों को
मन भींग सा गया था दरिया उफन आने के बाद.

विजय कुमार सिंह