कुछ अश्क अँधेरों में……

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👉दिनांक : ०४/०७/२०२१
👉दिन : रविवार
👉विधा : गजल
👉बह्र : 22 11 22 11 22 11 22
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【1】
कुछ अश्क अँधेरों में बहाने के लिए है ।
कुछ राज जमाने से छिपाने के लिए है ।
【2】
इक रात को खामोश निगाहों ने जगाया
बरसात ये यादों की रुलाने के लिए है ।
【3】
है नींद कहीं और कहीं चैन गुमा है
कुछ बात है दिल में जो बताने के लिए है ।
【4】
हर दर्द को खामोश हो हमने तो सहा है
कुछ चीखें हैं बाकी जो सताने के लिए है ।
【5】
है धड़कनों का शोर तो रफ्तार में साँसें
लगता है नया दौर भी आने के लिए है ।
【6】
राहों में लगी ठोकरों ने सीख दिया है
रिश्तों में पहल हर अजमाने के लिए है ।
【7】
जो दूर गए रूठ मनाये कब माने
लम्बी ये जुदाई तरसाने ले लिए है ।
【8】
परछाईं हमारी रहती दूर हमीं से
अपनी ही वफ़ा है जो निभाने के लिए है ।
【9】
कुछ आग है दिल की जो बुझाई न गयी थी
शायद ये “विजय” दिल को जलाने के लिए है ।
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👉स्वरचित, स्वप्रमाणित
👉विजय कुमार सिंह
👉पटना, बिहार.
👉@सर्वाधिकार सुरक्षित

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